भारत में कोरोना

भारत में कोरोना से बचाव के लिए पहला जनता कर्फ्यू 22 मार्च 2020 में लगाया गया था उसके बाद उसको बढ़ाकर 30 मार्च फिर 15 अप्रैल 3 मई तक किया गया 
परंतु अब वर्तमान में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी को चिंता में डाल दिया है सरकार का जनताा पर अलग अलग तरह का लोग डाउन लगाना भी चौंका देने वाला है रात्रि कर्फ्यू उसका एक उदाहरण है क्या कोरोना सिर्फ रात्रि में ही फैलता है क्या वह दिन में एक संक्रामक बीमारी नहीं होती और यदि दिन में भी कोरोना एक संक्रामक बीमारी है तो रात्रि कर्फ्यू क्यों क्यों इस बार विगत वर्ष की भांति सरकार लॉकडाउन लगा रही है क्योंकि इस बार चुनाव है इसलिए सरकार डर रही है की अगर संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया तो चुनाव कैसे होंगे मास्क लगाना और 2 गज की दूरी चुनावी रैली में क्योंनहीं लगाया जाता चुनाव प्रचार में क्योंं करोना के किसी भी गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता 
स्कूल बंद कर दिए जाते हैं लेकिन चुनाव प्रचार बंद नहीं होता क्यों जनता को गुमराह किया जा रहा है इतने बड़े देश में कोरोना की दूसरी लहर ने चिकित्सा व्यवस्था की सारी पोल खोल कर रख दी ऑक्सीजन की कमी होना सरकार पर एक प्रश्न चिन्ह है कि भारत की संपूर्ण जनता का कुछ प्रतिशत ही कोरोना संक्रमण होने पर भारत जैसे देश में ऑक्सीजन की कमी हो गई अगर 50% जनता संक्रमित हो जाती है तो देश में क्या हाल होगा समझ सकते हो बड़े-बड़े मंदिर और बड़ी-बड़ी मूर्तियां बनवाने के अलावा चिकित्सा व्यवस्था को भी बड़ा करना चाहिए था जिससे करोना जैसी महामारी से निपटा जा सके
जिस देश में कुछ लोगों के बीमार होने पर ही ऑक्सीजन की कमी हो जाए वहां आप सोच सकते हो की सरकार का जनता के प्रति क्या दायित्व है कोरोना पीड़ित की मौत होने के बाद उसके शव को परिजनों को ना देकर स्वयं अंतिम संस्कार कर देना यहां तक की अंतिम दर्शन भी ना करवा कर बिना बताए दाह संस्कार करना कितना न्याय उचित है खबरों में सुना जा रहा है कि कोरोना पीड़ित मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों को सिर्फ खबर दी जाती है ना सब दिया जाता है न दिखाया जाता है सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट ऐसी भी देखी जिसमें दिखाया गया कि कोरोना पीड़ित मरीज की मृत्यु के बाद शरीर के ऑर्गन की तस्करी की जा रही है यह कितना सच है कोई नहीं जानता लेकिन कुछ तो है जिसमें संदेह होता है कि मरने के बाद मानव अंगों की तस्करी का कोई ना कोई षड्यंत्र तो जरूर रचा जा रहा है ऊपर से सरकार जनता को कुछ राहत देकर ऐसे जता रही है जैसे बड़ा उपकार कर दीया हो
जब सरकार तमाम तरह के टैक्स जनता से वसूलती है तो क्या ऐसी महामारी से जूझती हुई जनता को सुरक्षा, खाद्य पदार्थ ya जरूरत की वस्तुएं मुहैया कराना क्या सरकार का फर्ज नहीं है
मेरा तो यह मानना है कि सभी देशवासियों को समय देते हुए यह बता दिया जाए कि संपूर्ण लोग डाउन लगने वाला है अपने जरूरत का सामान आप अपने पास सुरक्षित रख लें उसके बाद 1 महीने का या जितना भी हो सके संपूर्ण लॉकडाउन लगाना चाहिए तभी जाकर इस महामारी से छुटकारा पाया जा सकता है इस तरह छुटपुट बिना  बुनियादी समय का लॉकडाउन ना लगाएं क्योंकि ऐसे लोग डाउन से कोई लाभ नहीं होने वाला क्या करो ना रात को ही निकलता है सड़कों पर दिन में वह भाग जाता है कुंभ में 3500000 श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई मैंने समाचार में देखा और jaanch सिर्फ एक लाख की हुई जब देश ऐसी महामारी से जूझ रहा हो तो क्या कुंभ को बाद में नहीं किया जा सकता था मेरे विचार से किया जा सकता था लेकिन पता नहीं क्यों सरकार कोरोना को लेकर गंभीर नहीं है हां आम जनता पर अपने तुगलकी फरमान लगाने में सरकार बहुत गंभीर है मुझे तो लगता है पूरे भारत में संपूर्ण लोग डाउन अब तक इसलिए नहीं लगा क्योंकि इस बार चुनाव थे जैसे ही चुनाव खत्म होंगे लोग डाउन अपने आप ही लग जाएगा जिस सरकार के पास जनता के लिए हॉस्पिटल में मरीजों को पर्याप्त ऑक्सीजन देने को ना हो उसे सरकार से क्या उम्मीद की जा सकती है इसलिए मेरा सभी देशवासियों से कहना है कि कोरोना को गंभीरता से लें महामारी तो है अब उस महामारी को सरकार चाहे कैसे भी ले रही हो लेकिन हमें अपना बताओ खुद करना है इसलिए सभी गाइडलाइंस का पूर्ण इस्तेमाल करें उपयोग करें और खुद को सुरक्षित रखें अपने परिवार को सुरक्षित रखें और पूरे देश को सुरक्षित रखें आयरन मैन मूवी का एक डायलॉग मुझे याद आ रहा है "जान है तो जहान है "
सभी देशवासियों को मेरा नमस्कार🙏





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